हिमाचल के कुछ मंदिरों में मिलता है दो या तीन फीसदी ब्याज पर लोन

हिमाचल में बहुत से मंदिर ऐसे भी है, जहां देवी-देवताओं के आशीर्वाद के साथ लोन भी मिलता है। ऐसे मंदिर शिमला, सिरमौर, किन्नौर और लाहैल-स्पीति में है। इन मंदिरों में यह परंपरा सदियो पुरानी है। इन मंदिरों में जरूरतमंदों को आसानी से लोन मिल जाता है। ये कर्ज केवल एक साल के लिए ही दिया जाता है, जिस पर सालान दो या तीन फीसदी ब्याज चुकाना पड़ता है। देवता की आज्ञा से तो कई बार कर्ज माफ भी कर दिया जाता है।devta shirgul

मंदिर की कमेटी निश्चित करती है कि लोन का आवेदन करने वाला वाकई ज़रूरतमंद है या नहीं। लोन देते समय ये नहीं देखा जाता कि ये कर्ज वापस भी लौट पाएगा या नहीं, क्योंकि ये आस्था से जुड़ा हुआ मामला है और कोई भगवान को धोखा नहीं देगा।

अनाज भी कर्ज के रूप में– इन मंदिरो की ओर से केवल नगद ही नहीं दिया जाता, बल्कि अनाज भी कर्ज के रूप में दिया जाता है। यहां नगद राशि के बदले नगद और अनाज के बदले में अनाज ही के रूप में हीं चुकाना होता है

सिरमौर जिला के चूरधार में शिरगुल महाराज देवता बिना औपचारिकताओं के आसानी से लोन देते हैं । कई जगह देवी-देवता अपने क्षेत्र के अधीन गांवों के लोगों को ही कर्ज देते हैं। पेपरवर्क के नाम पर सिर्फ एक रजिस्टर होता है, जिसमें लोन की डिटेल दर्ज की जाती है।

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