साड़ा हिमाचल सबतों न्यारा

साड़ा हिमाचल सबतों न्यारा साड़ा हिमाचल सबतों न्यारा स्वर्ग एत्थू ओ, स्वर्ग एत्थू ओ देवों का आलय पर्वत हिमालय स्वर्ग एत्थू ओ, स्वर्ग एत्थू ओ ।
भोले-भाले लोकी इसदे भोलीयाँ-भालीयाँ शक्लाँ सीढ़ीनूमा खेत एत्थू हरियाँ-भरीयाँ फसलाँ डूगे-डूगे नालू, खड़े कुआलू स्वर्ग एत्थू ओ, स्वर्ग एत्थू ओ।
रीड़िया-रीड़िया खम्भे एत्थू लम्मीयाँ-लम्मीयाँ ताराँ राती जो टिम-टिम करदे एत्थू लाटू लखाँ-हजाराँ गद्दीयाँ दे धण घणे-घणे वण स्वर्ग एत्थू ओ, स्वर्ग एत्थू ओ ।
ग्राँ-ग्राँ सड़काँ वणी गईयाँ घर-घर लगी गये नलके सिरे पर समाने ढ़ोणे ते छुटी गै ढ़ोणा नी पोंदे मटके घरें-घरें बिजली घरें-घरें फोन स्वर्ग एत्थू ओ, स्वर्ग एत्थू ओ ।
जेठ महीने च मेले जे लगदे सज्जी-धज्जी जांदीयाँ नाराँ नंदपुर दा मेला कुल्लु दा दशेरा दिखदे लोकी हजाराँ मनाली दा हनीमून शिमले दी सैर स्वर्ग एत्थू ओ, स्वर्ग एत्थू ओ ।
देवी देवतयाँ दा प्रदेश हिमाचल लगदा बड़ा ही सोहणा इक वरी जेड़ा आई जाँदा एत्थू वार-वार चाहदाँ ओणा पाणीये घराट, सैलाँ दे टप्परू स्वर्ग एत्थू ओ, स्वर्ग एत्थू ओ ।
लहौलस्पिति चम्बा मँडी काँगड़ा कुल्लू किन्नौर ऊना-बिलासपुर हमीरपुर शिमला सोलन सिरमौर घूमी के बारह ज़िले सैलानी बोलदे वनस मोर स्वर्ग एत्थू ओ, स्वर्ग एत्थू ओ ।

लेखक- बालक राम चौधरी (हिमाचली)

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